बेशक मीनारों सी खूबसूरत तू मुझे तेरे जज्बात भी चाहिए यूँ तो मिलते हर रोज़ है हम मुझे तुमसे संवाद भी चाहिए कहते है लोग की तुम सिर्फ मेरे लिए बनी हो मुझे सिर्फ सपना नही यथार्थ भी चाहिए बेशक मीनारों सी खूबसूरत तू मुझे तेरे जज्बात भी चाहिए माना मेरी एक पुकार पर तू अपना संसार छोड़ आएगी मगर मुझे सिर्फ तू नही तेरा संसार भी चाहिए बेशक मीनारों सी खूबसूरत तू मुझे तेरे जज्बात भी चाहिए बेशक तू राधा सी सरल मगर मुझे रुक्मणि सी चाहिए तेरे संग कोई अनूठी कविता नहीं मुझे पूरी की पूरी कहानी चाहिए बेशक मीनारों सी खूबसूरत तू मुझे तेरे जज़्बात भी चाहिए बेशक तू फाग सी मदमस्त मुझे पौष सी सुस्ती भी चाहिए तेरे संग जवानी नहीं मुझे पूरी की पूरी जिं दगा नी चाहिए बेशक मीनारों सी खूबसूरत तू मुझे तेरे जज़्बात भी चाहिए
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