गठबंधन ताश के पत्तो का महल या सत्ता की सीढ़ी
भारतीय राजनीति हो या समाज यहां गठबंधन का एक अपना महत्वपूर्ण रोल है । भारतीय समाज में जहां दो व्यक्ति जुड़कर जीवन के अभिन्न सुखों को भोगने के लिए संघर्ष करते है, तो कोई सामाजिक कार्य, बिना गठबंधन के संभव नही होता । गठबंधन में बंधने वाले लोग अक्सर अपनी स्वयं की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए या ऐसी इच्छाएं जो गठबंधन में जुड़ने वालें दोनो पक्षों की समान होती है पाने के लिए एक साथ प्रयास करते है, और परिणाम को आपस में बांटकर भोगते है । भारतीय समाज में गठबंधन से पूर्व कई चीजे देखी जाती है, जैसे जुड़ने वाले व्यक्तियों को सामाजिक व्यक्तित्व, जाति, धर्म कुल मिलाकर यही सुनिश्चित किया जाता है कि ये गठबंधन कोई नई समस्याएं खड़ी न करे । वहीं अगर राजनीति की बात करे, तो भारतीय राजनीति में गठबंधन की शुरुआत larger than country image वाली प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी को पद से हटाने के लिए संपूर्ण विपक्ष ने एकमत होकर जनता पार्टी के रूप में गठबंधन किया । और अपना लक्ष्य प्राप्त किया। ये गठबंधन का एकमात्र लक्ष्य था इंदिरा जी को पद से हटाना । लक्ष्य प्राप्ति के बाद गठबंधन एक दम दिशाहीन हो गया । और 02 वर्ष बाद ही पुनः इंदिरा जी की वापसी हुई । उसके बाद राजीव जी को सत्ता से हटाने श्री वी पी सिंह जी ने गठबंधन बनाया, उसके बाद पी नरसिम्हा राव जी, और फिर अटल बिहारी जी और मनमोहन सिंह जी । खैर मोदी जी की पहली सरकार भी गठबंधन की थी, किंतु भाजपा ने अपने दूसरे कार्यकाल में पूर्ण बहुमत पाने के बाद भी एन डी ए गठबंधन के कुछ साथियों को मंत्री बनाया । अकसर राजनीतिक गठबंधन में एक दल अपेक्षाकृत बड़ा और बाकी दल छोटे होते है । अब 2024 का चुनाव सामने है । विपक्ष मोदी के तिलिस्म से निपटने के लिए इंडिया नाम के गठबंधन के साथ सामने आया तो है, किंतु इस गठबंधन में सबसे बड़ी समस्या है, आपस के हिससेदारी सुनिश्चित करना । हर कोई चाहता है उसे उसका पूरा हिस्सा मिले और ये सारा हिस्सा अधिकांशतः एक ही पार्टी के कोटे से कम हो रहा है । 2023 विधानसभा चुनाव ने कांग्रेस की स्थिति और खराब कर दी है । ऐसे में क्या ये गठबंधन अपना उद्देश्य पूर्ण कर पायेगा या खुद में उलझ कर सत्ता पक्ष को लाभ करेगा इन सब सवालों के जवाब तो लोकसभा चुनाव 2024 के बाद ही मिलेगा । साथ ही ये भी देखना होगा की भारतीय जनता पार्टी जो कि मोदी जी के तिलिस्म और धार्मिक, राष्ट्रवाद के रथ पर सवार होकर गठबंधन का कितना ख्याल रखता है । सत्ता का सफर गठबंधन से ही तय होगा या फिर भाजपा 400 पर करेगी ये देखना भी दिलचस्प होगा ।
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